शिमला के शांत गलियों में दहशत फैल जाती है, जब धनी व्यापारी रमाकांत त्रिपाठी की उनकी हवेली में बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। उनकी लाश मिलती है, उनका सीना चीरा हुआ होता है, और उनके दिल को गायब पाया जाता है। पुलिस विभाग में हड़कंप मच जाता है। आदित्य सिंह को जांच का कार्य सौंपा जाता है, जो निडर और ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर हैं।
आदित्य घटनास्थल का निरीक्षण करते हैं और फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर साक्षी शर्मा से बातचीत करते हैं। साक्षी अपराध स्थल से मिले साक्ष्यों का विश्लेषण करती हैं और उसे पता चलता है कि हत्यारे ने सर्जिकल दक्षता के साथ दिल निकाला है।
एक युवा पत्रकार विवेक राणा इस मामले का ध्यान से अध्ययन कर रहा है। वह आदित्य से संपर्क करता है और अपनी थ्योरी साझा करता है, जिसमें उसका मानना है कि यह हत्या कोई साधारण नहीं है, बल्कि यह किसी नृशंस अनुष्ठान का हिस्सा हो सकता है।
कुछ दिनों बाद, एक और हत्या होती है। इस बार, सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष मेहरा को उसी तरह मार दिया जाता है और उनका भी दिल गायब पाया जाता है। आदित्य को लगता है कि विवेक की थ्योरी में कुछ है, और वह उसके साथ मिलकर काम करने का निर्णय करता है।
साक्षी की मदद से आदित्य और विवेक हत्याओं के बीच एक पैटर्न ढूंढते हैं। उन्हें पता चलता है कि दोनों पीड़ितों का कुछ समय पहले एक ही चैरिटी कार्यक्रम में एक साथ देखा गया था। वे उस कार्यक्रम में मौजूद लोगों से पूछताछ करते हैं और एक अहम सुराग मिलता है।
पूजा मिश्रा नाम की एक कॉलेज छात्रा बताती है कि उसने रमाकांत और आशुतोष को एक गुप्त बैठक करते देखा था। पूजा आदित्य को एक पते के बारे में भी बताती है। यह पता एक सुनसान इमारत का है। आदित्य और उसकी टीम उस इमारत पर छापा मारती है और वहां एक भयानक तस्वीर सामने आती है।
