अगर संसद में प्रस्तावित नया आयकर विधेयक पारित हो जाता है, तो यह 1 अप्रैल 2026 से 60 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह ले सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में नया आयकर विधेयक, 2025 पेश किया, जिसे अब वित्तीय मामलों की संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा गया है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आयकर अधिनियम, 1961 और प्रस्तावित नया आयकर विधेयक, 2025 में क्या प्रमुख अंतर हैं और करदाताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
1. आकार और भाषा में बदलाव
आयकर कानून को सरल और अधिक सुगम बनाने के लिए इसका पुनरावलोकन किया गया।
- नया विधेयक छोटा और संक्षिप्त बनाया गया है।
- जटिल कानूनी भाषा को सरल किया गया है।
- अनावश्यक स्पष्टीकरण और दोहराव को हटा दिया गया है।
- प्रावधानों को स्पष्ट रूप से समझाने के लिए टेबल्स का उपयोग किया गया है।
2. असेसमेंट ईयर की जगह टैक्स ईयर
नए विधेयक में असेसमेंट ईयर (आकलन वर्ष) की जगह टैक्स ईयर (कर वर्ष) शब्द का उपयोग किया गया है।
- टैक्स ईयर वही रहेगा जो वित्त वर्ष होता है, यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक।
- यदि कोई नया बिजनेस, पेशा या आय का स्रोत किसी वित्त वर्ष के दौरान शुरू होता है, तो टैक्स ईयर उसी वित्त वर्ष में शुरू और समाप्त होगा।
यह बदलाव कंफ्यूजन कम करने के लिए किया गया है।
3. टैक्स स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं
- नए विधेयक में टैक्स स्लैब या दरें वैसी ही रहेंगी जैसी अभी हैं।
- इसका मुख्य उद्देश्य कानून को सरल बनाना और कर अनुपालन को आसान बनाना है।
- करदाताओं और कर अधिकारियों के लिए भ्रम की स्थिति न हो, इसलिए केवल भाषा और प्रस्तुति में बदलाव किया गया है।
4. रेजिडेंशियल स्टेटस में कोई बदलाव नहीं
नए विधेयक में निवासीय स्थिति (Residential Status) से जुड़े नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- धारा 6 को दोबारा लिखा गया है ताकि इसे आसान भाषा में समझाया जा सके।
- कुछ उप-धाराओं (Sub-clauses) को अक्षरों के बजाय संख्याओं के साथ निर्दिष्ट किया गया है।
- कंपनियों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए निवासीय स्थिति तय करने के नियम पहले जैसे ही रहेंगे।
5. आय की श्रेणियों में कोई बदलाव नहीं
आयकर अधिनियम, 1961 में पांच प्रमुख आय स्रोत थे, जिन्हें नए विधेयक में भी बरकरार रखा गया है:
- वेतन (Salary Income)
- गृह संपत्ति से आय (Income from House Property)
- व्यवसाय या पेशे से लाभ (Profit or Gain from Business or Profession)
- पूंजीगत लाभ (Capital Gains)
- अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources)
कोई नई श्रेणी नहीं जोड़ी गई और न ही मौजूदा वर्गीकरण में कोई परिवर्तन किया गया है।
6. कुछ नियमों को स्पष्ट रूप से अलग किया जाएगा
पुराने अधिनियम में कई प्रावधान ऐसे थे, जिन्हें आयकर रिटर्न (ITR) से जोड़कर पढ़ना पड़ता था।
- छूट (Exemptions) के मामलों में करदाता को ITR फाइलिंग गाइडलाइंस और आयकर अधिनियम, दोनों को संदर्भित करना पड़ता था।
- नए विधेयक में ऐसे नियमों को अलग-अलग स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाएगा, जिससे कर अनुपालन आसान होगा।
7. धारा 10 के तहत छूट को टेबल फॉर्मेट में प्रस्तुत किया जाएगाg
- कृषि आय
- पार्टनरशिप फर्म में लाभांश का हिस्सा
- पारिवारिक पेंशन
- छात्रवृत्ति
- NRE/FCNR डिपॉजिट पर ब्याज
इन सभी छूटों को शेड्यूल II से VII तक टेबल फॉर्मेट में व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे इन्हें आसानी से समझा जा सके।
8. TDS और TCS के प्रावधानों को टेबल फॉर्मेट में प्रस्तुत किया गया
आयकर अधिनियम, 1961 में कई TDS और TCS से संबंधित प्रावधान अलग-अलग सेक्शन में थे, जिनमें मामूली अंतर होते थे।
नए विधेयक में:
टेबल के जरिए इन प्रावधानों को संक्षिप्त और समझने में आसान बनाया गया है।
9. अप्रवासियों के लिए कर भुगतान से जुड़े बदलाव
- टैक्स रेट स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- हालांकि, अप्रवासियों (Non-residents) के लिए भुगतान जैसे रॉयल्टी, टेक्निकल सर्विसेज, ब्याज आदि को धारा 207 में समाहित किया गया है।
- कर दरों को टेबल फॉर्मेट में प्रस्तुत किया गया है, जिससे करदाताओं को स्पष्टता मिलेगी।
निष्कर्ष: नया विधेयक क्या बदलाव लाएगा?
- कोई बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया गया है।
- भाषा को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है।
- करदाताओं और अधिकारियों के लिए स्पष्टता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है।
- अनावश्यक जटिलताओं को हटाया गया है, जिससे अनुपालन आसान हो।
यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यह 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 1961 की जगह ले सकता है। हालाँकि, टैक्स रेट और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए करदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
क्या यह बदलाव करदाताओं के लिए फायदेमंद होगा?
यह मुख्यतः सरलता और स्पष्टता प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जिससे कर अनुपालन अधिक सहज और पारदर्शी बन सके।


